रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि।। विमोह जोगनामोह सर्व मोग्या था था थाह स्वाहा हे गौरी शंकरार्धांगिं! यथा त्वं शंकरप्रिया। ← वशीकरण करने के तरीके – वशीकरण के उपाय और टोटके – vasheekaran karane ke tareeke – vashikaran ke upay aur totake ओम हरिम काली कपलिनी जगातील इतर https://charliedytme.izrablog.com/34486359/the-5-second-trick-for-sadhna